Happy Hindi Poems
meree kavitaon ka guldasta
Monday, September 12, 2011
Wednesday, March 2, 2011
Thursday, April 30, 2009
मदर्स डे
तुम्हारा दिया मदर्स डे का तोहफा
खोला नहीं मैने!
पहले तो देर तक महसूसती रही
उस व्यस्तता को
जो काम की आपाधापी में
तुम्हें पेश आई होगी
फिर तुम्हारी अंगुलियों की छुवन
तलाशती रही!
जब खोला तो देखा
तुमने अपने हाथ से
बनाया एक एप्रेन
भेजा था मुझे!
लगा कि तुम जब आओगी
इसे पहनकर
तुम्हारा मनपसंद खाना
बनाकर खिलाउंगी तुम्हें!
पर तुम कब आओगी
मैं कब अपने उपहार का
इस्तेमाल कर पाउंगी
यही सवाल रह-रह कर
सिर उठाता है!
एक वो मदर्स डे होता था
तब चाहे तुम कम से कम
पैसों से नन्हीं-नन्हीं भेंट
साइकिल से लाया करते थे!
अब कीमती तोहफे तो होते हैं
पर तुम नहीं होतीं
जानती हो?
कीमती उपहारों की
भारी कीमत चुका रहीं हूं, इन दिनों!
